टीपू सुल्तान - मैसूर का शेर
टीपू सुल्तान का जन्म 20 नवंबर 1751 को हुआ था। उसका पूरा नाम फतेह अली टीपू था। अंग्रेज उसे "मैसूर का शेर" कहते थे क्योंकि वह शेर की तरह बहादुर था।
एक बार की बात है, टीपू जंगल में शिकार करने गया था। अचानक उसके सामने एक शेर आ गया। टीपू के पास कोई हथियार नहीं था, सिर्फ एक छोटा सा चाकू था।
तभी से उसका नाम "मैसूर का शेर" पड़ गया।
टीपू सुल्तान भारत का पहला शासक था जिसने रॉकेट का इस्तेमाल युद्ध में किया था। उसने अंग्रेजों के खिलाफ 4 युद्ध लड़े।
अंग्रेजों ने कई बार उसे लालच दिया - "तुम हमसे दोस्ती कर लो, हम तुम्हें पूरा दक्षिण भारत दे देंगे।"
टीपू ने जवाब दिया - "शेर की तरह एक दिन जीना अच्छा है, गीदड़ की तरह 100 साल जीने से। मैं अंग्रेजों का गुलाम कभी नहीं बनूंगा।"
4 मई 1799 को श्रीरंगपटना के युद्ध में टीपू सुल्तान लड़ते हुए शहीद हो गया। कहते हैं जब अंग्रेजों ने उसका शव देखा तो वह किले के दरवाजे पर पड़ा था, हाथ में तलवार थी।
अंग्रेज जनरल ने कहा था - "आज से मैसूर गया, लेकिन हिंदुस्तान का एक शेर सो गया।"