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औरंगजेब - टोपी सिलकर पेट भरने वाला बादशाह

औरंगजेब मुगल साम्राज्य का आखिरी बड़ा बादशाह था। उसके पास अपार दौलत थी, लेकिन फिर भी वह बहुत सादा जीवन जीता था।

कहा जाता है कि औरंगजेब अपने हाथ से टोपियां सिलता था और कुरान की नकल करके उन्हें बेचता था। उससे जो पैसा मिलता था, उसी से वह अपना खर्च चलाता था।

एक दिन उसके दरबार में एक गरीब आदमी आया और बोला - "जहांपनाह, मैं बहुत भूखा हूँ।"

औरंगजेब ने अपने खजांची से कहा - "इसे खजाने से 100 रुपये दे दो।"

खजांची ने कहा - "हुजूर, खजाना तो आपका ही है।"

औरंगजेब ने जवाब दिया - "खजाना प्रजा का है, मेरा नहीं। मेरा पैसा तो वही है जो मैंने टोपी बेचकर कमाया है। और मेरे पास अभी सिर्फ 5 रुपये हैं, वह इस गरीब को दे दो।"

यह सुनकर दरबार में सन्नाटा छा गया। एक बादशाह जिसके पास करोड़ों का खजाना हो, वह 5 रुपये की बात कर रहा है!

औरंगजेब ने कहा - "अल्लाह ने मुझे बादशाह बनाया है, मालिक नहीं। मैं खजाने का रखवाला हूँ, मालिक प्रजा है। अगर मैं खजाने से अपने लिए खर्च करूंगा, तो अल्लाह को क्या जवाब दूंगा?"

उस गरीब को औरंगजेब ने अपनी टोपी बेचकर मिले 5 रुपये दे दिए। बाद में उसने आदेश दिया कि इस गरीब को शाही खजाने से नौकरी दी जाए।

💡 सीख: ईमानदारी सबसे बड़ी दौलत है। पद बड़ा होने से व्यक्ति बड़ा नहीं होता, उसकी सोच बड़ी होनी चाहिए।
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