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महमूद गजनवी और ईमानदार सिपाही

एक बार महमूद गजनवी अपने सैनिकों के साथ जंगल में शिकार करने गया था। शिकार करते-करते वह अपने सैनिकों से बिछड़ गया और अकेला रह गया। शाम होने लगी थी।

भटकते-भटकते उसे एक झोपड़ी दिखाई दी। उस झोपड़ी में एक बूढ़ी औरत रहती थी। महमूद ने उससे पानी मांगा। बूढ़ी औरत ने उसे पानी दिया और पूछा - "तुम कौन हो?"

महमूद ने अपना परिचय नहीं दिया और कहा - "मैं महमूद की सेना का एक सिपाही हूँ।"

बूढ़ी औरत गुस्से में बोली - "उस लुटेरे महमूद का नाम मत लो। वह हर साल हमारा सब कुछ लूट ले जाता है।"

महमूद चुप रहा। रात को जब वह सो रहा था, तो उसने देखा कि बूढ़ी औरत अपनी बेटी से कह रही है - "इस सिपाही के पास अच्छा घोड़ा और हथियार हैं, हम इसे मारकर सब ले लेते हैं।"

महमूद सतर्क हो गया। उसने अपनी तलवार निकाली और कहा - "माई, मैं ही महमूद हूँ। तुम मुझे मारना चाहती हो?"

बूढ़ी औरत डर गई और उसके पैरों में गिर गई। महमूद ने कहा - "डरो मत। तुमने मुझे सच बताया, इसलिए मैं तुम्हें सजा नहीं दूंगा।"

बूढ़ी औरत ने पूछा - "क्या तुम सच में हमें नहीं लूटोगे?"
महमूद ने कहा - "मैं धन के लिए लड़ता हूँ, गरीबों को सताने के लिए नहीं। आज के बाद तुम्हारे गाँव से कोई कर नहीं लिया जाएगा।"

अगले दिन महमूद ने सच में उस गाँव का कर माफ कर दिया। उसके मंत्री ने पूछा - "आपने ऐसा क्यों किया?"

महमूद ने जवाब दिया - "एक बूढ़ी औरत ने मुझे मेरी असली पहचान बताई। अगर प्रजा मुझे लुटेरा कहती है, तो मुझे सोचना चाहिए। बादशाह को प्रजा का दिल जीतना चाहिए, सिर्फ जमीन नहीं।"

💡 सीख: ताकत से जमीन जीती जा सकती है, लेकिन दिल नहीं। सच्चा बादशाह वही है जो प्रजा के दिल में रहता है।
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